STORYMIRROR

J P Raghuwanshi

Inspirational

3  

J P Raghuwanshi

Inspirational

"सांझ"

"सांझ"

1 min
387

सूर्य अस्ताचल की ओर चला,

सुनहरी रश्मियां बिखेरता।

धीरे-धीरे आ रहा है अंधेरा,

धरती को घेरता।


कलरव करते पक्षी,

नीड़ों की ओर बढ़ चले।

गोधूलि उड़ रही,

सांझ लागी भले।


थका मांदा आदमी,

अब लौट चला घर को।

घुप्प अंधेरा छा गया,

घेरा गांव, घर शहर को।।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational