Naveen kumar Bhatt
Fantasy
तेजी से बदलता,
हर ओर सरलता,
साइंस का जमाना
हो बेहतर कमाना
बातें करते पक्की।
इस तरह तरक्की।
साइंस का बागडोर
छाया हुआ चहुंओर।
गजल
मुक्तक
साहित्य उदय
ग़ज़ल
नेक दिल
साइंस फिक्शन
पौराणिक कथा
स्वतंत्रता
ख्वाब
कभी तुम यूँ करना कि हमेशा के लिए सिर्फ मेरे हो जाना। कभी तुम यूँ करना कि हमेशा के लिए सिर्फ मेरे हो जाना।
हाँ! बेमानी है तुम्हें ढूंढना , जग के किसी भी नज़ारे में! हाँ! बेमानी है तुम्हें ढूंढना , जग के किसी भी नज़ारे में!
ख़ुदा की रहमत से जज़्बात उतरे कागज़ पर। ख़ुदा की रहमत से जज़्बात उतरे कागज़ पर।
सारे धर्म के सम्मान में, सिर उनका खुद झुक गया। सारे धर्म के सम्मान में, सिर उनका खुद झुक गया।
परिस्थितियाँ अनुकूल होगी इस पर जागता विश्वास है। परिस्थितियाँ अनुकूल होगी इस पर जागता विश्वास है।
कल्पना को हकीकत बना नहीं पाती हूँ कल्पना को हकीकत बना नहीं पाती हूँ
हवा के हिंडोले पर बैठ कर चाँद के घर दावत पर चल। हवा के हिंडोले पर बैठ कर चाँद के घर दावत पर चल।
वरना गलती निकालने वाले तो ताज महल में भी निकालते हैं। वरना गलती निकालने वाले तो ताज महल में भी निकालते हैं।
तब शायद राधा राधा होगी और मीरा केवल मीरा। तब शायद राधा राधा होगी और मीरा केवल मीरा।
स्वीकृति भी धरा की छोर-छोर नज़र आती है रूत ये सावन चित्तचोर नज़र आती है। स्वीकृति भी धरा की छोर-छोर नज़र आती है रूत ये सावन चित्तचोर नज़र आती है।
सर्वशक्तिमान होने का गुरुर कोई तो है जिसके आगे हो तुम सब बेबस, मज़बूर। सर्वशक्तिमान होने का गुरुर कोई तो है जिसके आगे हो तुम सब बेबस, मज़बूर।
सपने देखो जरुर देखो बस उनके पुरे होने कि शर्त मत रखो ---चित्रपट: दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे (1995) सपने देखो जरुर देखो बस उनके पुरे होने कि शर्त मत रखो ---चित्रपट: दिलवाले दुल्हनि...
उसके खातिर मेरे हर दुआ को तुने अपनी रजा दी है। उसके खातिर मेरे हर दुआ को तुने अपनी रजा दी है।
तो अगर परवाह करना भी गलत है तो हाँ मैं बेवकूफ हूँ। तो अगर परवाह करना भी गलत है तो हाँ मैं बेवकूफ हूँ।
तुम मुझे लगता था नई इन्सान अपने के बारे सोच कर सकते खुद को संभालो। तुम मुझे लगता था नई इन्सान अपने के बारे सोच कर सकते खुद को संभालो।
आधी रातों की वें आधी बातें आधी बातों के वें अधूरे किस्से, अधूरे किस्सों के थमे हुए सि आधी रातों की वें आधी बातें आधी बातों के वें अधूरे किस्से, अधूरे किस्सों के थमे...
ख्वाबों की वो तितलियाँ.. ख्वाबों की वो तितलियाँ..
बस एक ख्वाहिश बची है काश ! मुझे फिर मिल जाए बचपन। बस एक ख्वाहिश बची है काश ! मुझे फिर मिल जाए बचपन।
बस एक महफ़िल हो, जिसके मंच पर हर कवि हो । बस एक महफ़िल हो, जिसके मंच पर हर कवि हो ।
ऐसा लगता है जैसे हम नहीं, कविता हमें रच रही है। ऐसा लगता है जैसे हम नहीं, कविता हमें रच रही है।