STORYMIRROR

Naveen kumar Bhatt

Others

3  

Naveen kumar Bhatt

Others

ख्वाब

ख्वाब

1 min
125

ख्वाबों में ख्वाब देखता जा रहा।

कुछ एक किताब देखता जा रहा।

कितने अरमां पिरोए थे इस जहां,

यत्र तत्र खिताब लेखता जा रहा।।


रातों में फैले उस ख्वाब में डूबता,

हुई आंख नम उसे जैसे मैं ढूंढता,

वो सपना हमको पिरोता जा रहा,

लक्ष्य साधता रहे खुश हो झूमता।।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन