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बृज व्यास

Abstract Children Stories


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बृज व्यास

Abstract Children Stories


" रूठी लगे बहार है " !!

" रूठी लगे बहार है " !!

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हरे भरे हम पेड़ न काटें ,

हमें छाँह दरकार है !

हाथ जोड़ करे प्रकृति ,

हमसे यही गुहार है !!



कानन सूने सूने लगते ,

वनचर है भयभीत सभी !

नभ बादल को तरस रहे हैं ,

प्यासे , सागर ,सरित सभी !

मेघा भी बरसे तो ऐसे ,

जैसे पड़े फुहार है !!



हरियाली गुमसुम लगती है ,

मौसम थपकी देता है !

सूरज ताप बढ़ाता अपनी ,

रोज परीक्षा लेता है !

और यहाँ मानव के हाथों ,

चम चम चमके धार है !!



बड़ा प्रदूषण , घुला जहर है ,

हुई हवाएं जहरीली !

रोज उमर घटती जाती है ,

लगे हरितिका सपनीली !

धरणी भी रूठी रूठी है ,

रूठी लगे बहार है !!





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