रूतबा...
रूतबा...
क्या लेकर जाओगे, बन्दे
इस जीवन नैया के उस पार...?
न दौलत तुम्हारे साथ जाएगी,
न शोहरत जो किया तुमने हासिल...?
बस ये शरीर जो तुम्हारा है,
वो भी न जाएगा साथ तुम्हारे...
यहीं इस धरती पर ही
मिटकर रह जाएगी...!
फिर क्यों रूतबा दिखाने की ज़रूरत...
जब ये जान तुम्हारे शरीर से रुखसत होगी,
तब तुम्हारा वजूद भी न रहेगा इस जहाँ में...???
