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Chetan Gondalia

Abstract

3.6  

Chetan Gondalia

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ऋतुराज बसंत

ऋतुराज बसंत

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पवन, पंछी, पुष्प के सरताज बसंत

षडऋतु के ऋतुराज बसंत।


ये आए महके चमन,

पतझड़ कर ले त्वरित गमन

षडऋतु के ऋतुराज बसंत।


ओ सिमेंटवन के कोकिलों ! उठो, दौड़ो !

महेमाँ जंगल के कभी हो लो..,

फूल, टहनी, पेड़ों के संग डोलो

षडऋतु के ऋतुराज बसंत।


यहाँ कहीं खुशियों के गुलाल उड़ते,

और कहीं दिल-दिल से जुड़ते।

अपने तीक्ष्ण सारे शूल-भूल,

नशे में मदमस्त यहाँ बबूल।


तेरा दम्भ यहाँ फ़िज़ूल ,

क्योंकि षडऋतु के

ऋतुराज बसंत ...!


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