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Archana Tiwary

Abstract Others

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Archana Tiwary

Abstract Others

रो पड़ती है

रो पड़ती है

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दर्द जब सहन न होता

     रो पड़ती है स्त्रियां

रो कर आँसुओं संग

    बहा देती है 

कतरा दर्द का

   चाहती है आए कोई चुपके से

आँसू न पोंछे तो

    कोई बात नहीं पर

दर्द की वजह पूछे

  टुकड़ा छोटा सा दर्द का 

है जो दिल में छिपा

  आँसुओं संग बह न पाया जो 

अब तक 

   निकाल उसे 

बोले दे

प्यार भरे दो शब्द

  चीख की आवाज़ 

जो न सुन पाया कोई 

    अब तक

  एक बार सुन 

सहला दे हौले हौले

सिर रख कंधे पर

    फिर फिर 

हो जायेगी

  खुश उस पल


    



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