STORYMIRROR

Vijay Kumar parashar "साखी"

Abstract

4  

Vijay Kumar parashar "साखी"

Abstract

रंग

रंग

1 min
23.1K

रंगों का हमसे बड़ा गहरा नाता है

कोई न कोई रंग सबको भाता है

किसी को सफ़ेद, किसी को काला

सबके दिल को कोई तो रंग भाता है


कोई रंग हंसाता है

कोई रंग रुलाता है

वो हमारे कर्मों से पता चल जाता है

रंगों का हमसे बड़ा गहरा नाता है


अच्छा रंग,अच्छा कर्म ही बताता है

शूलों में भी वो फूलो को महकाता है

बदरंग आदमी का बुरा कर्म बताता है

कहते है उसे हम कलंक लग जाना,

बदरंग सब लोगो को बड़ा सताता है


रंगों का हमसे बड़ा गहरा नाता है

दुनिया को वो अपने रंग में रंग जाता है

जिसका श्वेत निर्मल मन से नाता है

वो रंग सदा ही जग में उड़ जाता है


जो अंदर-बाहर से छद्म रंग दिखाता है

वो रंग सदा खुशियां लेकर आता है

परोपकार की भावना से जो आता है

ये ज़माना उस रंग को याद करता है


जो रंग ख़ुदा की इबादत से आता है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract