STORYMIRROR

Kanchan Prabha

Abstract Classics Inspirational

3  

Kanchan Prabha

Abstract Classics Inspirational

रंग- पीला धूप

रंग- पीला धूप

1 min
204

मंडप प्रभा जाल लगे

धरा गोद बाल लगे

कभी हथेली चूमती

कभी खिले सुर्यमुखी


विधाता ये अजीब सा

उद्भ्ट प्राण गीत सा

पथिक के पाश बँध कर

कविता या छन्द कर


किसी के मुख चूम कर

विश्व पूर्ण घूम कर

डरा नही घटा नहीं

क्षेत्र में बँटा नहीं


जग हुआ महान

मुग्ध आसमान

सूर्य के प्रताप से

तिमिर तेज ताप से।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract