STORYMIRROR

Kavita Chouhan

Classics Fantasy Inspirational

4  

Kavita Chouhan

Classics Fantasy Inspirational

रम्य निशी

रम्य निशी

1 min
2



छोटे-छोटे  पुष्प  चुन लाना 

पात पात  को  ना बिखराना 

सुंदर मधुमय सी शाम निराली 

निशी की वो सुरमई प्याली 


मदमस्त हुई लतायें सारी 

महकी है बगिया फुलवारी 

अंतस को देती महकाये 

धवल सी आभा दिखलाये 


हिय चाहे यही थम जाना 

सुनो विहग का वो तराना 

झर झर बहती सुंदर तटिनी 

कभी लगती कुछ एकाकिनी 


बह रही सुन मलय बयार सी

मनभावन एक प्रीत प्यार सी  

चंपा चमेली पथ में बिखरी 

मंद आलोक  से यामा निखरी 


जगमग आलोकित दीपशिखा 

धवल रम्य सी नीलगगन रेखा 

दिलकश मौसम बना सुहाना 

अधखिली कलियों का मुस्काना


नीर में तैर रही जलकुंभी 

देखते नयन स्वप्न सतरंगी 

मधुर निशी का विलास है

हिय में पल रही इक आस है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Classics