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S N Sharma

Inspirational

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S N Sharma

Inspirational

रिश्तों की खातिर

रिश्तों की खातिर

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रिश्तों की खातिर झुक जाना भाता है तेरे मन को।

जैसे सूरज ढल जाता है अपने चांद को पाने को।

यह तो है कि चांद और सूरज दोनों है गगन बिहारी।

प्यार बहुत दोनों करते है पर दोनों में है दूरी भारी।

एक ही खातिर एक ढलता है एक दूजे को पाने को

जैसे सूरज ढल जाता है अपने चांद को पाने को।

मिलन अधूरा युगों युगों से प्यास प्रेम की नहीं बुझी।

ये ऐसी उलझन थी जो आज तलक भी न सुलझी।

जीवन यूं ही बीता जाए बिन पाए खो जाने को।

जैसे सूरज ढल जाता है अपने चांद को पाने को।



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