रिमझिम बरसात में
रिमझिम बरसात में
रिमझिम बरसात की फुहारों के बीच
मैंने तुम्हारा हाथ पकड़ लिया था खींच
तुम शरमाई सी सकुचाई सी घबराई सी
मेरी बांहों में और मैंने तुम्हें लिया भींच
जुल्फों से टपकते पानी ने तूफां उठाया
तुमने अपना मुंह शर्म से उनमें छुपाया
आंखों से छम छम शराब बहने लगी
मेरी नस नस भी नशे में बहकने लगी
गालों पे फिसलते पानी की राग मल्हार
दिलों को कर गया पागल और बेकरार
गुलाब की पंखुड़ियों से अधरों का कंपन
एक पल में सदियों जी गया ये तन मन
आंचल को बार बार निचोड़कर पोंछना
आगे बढ़ने से बार बार वो तुम्हारा रोकना
ऐसे बेईमान मौसम में दिल कैसे संभले
न जाने कब तक भीगते रहे हम हौले हौले
काश , कि वो शाम एक बार फिर से आए
आसमान पे काली काली घटाएं फिर छाए
फिर से छम छम बूंदों के रूप में प्यार बरसे
हम तुम वैसे ही भीग जाएं एक बार फिर से

