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bhagawati vyas

Abstract

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bhagawati vyas

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रहस्य

रहस्य

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गोपनीय जो रहा सर्वदा,

भय का वह संचार करे !

है रहस्य का जन्म यहीं से ,

जन मन यह स्वीकार करे !!


कथा, कहानी, भेद भरे हों,

यह रुचिकर बन जाते हैं !

बीता कल या वर्तमान हो,

हमसे जुड़ ही जाते हैं !

गहरी श्वांसे मन भरता है,

काया जाए है सिहरे !!


महल, किले हों, भवन पुराने,

हैं रहस्य में सिमटे से !

अँधियारा है, धुंध घना सा,

रहें उन्हीं में लिपटे से !

कई कथाएं जुड़ी हुई हैं,

राज छिपे गहरे,गहरे !!


धर्म प्रतीक, कई देवालय,

जहाँ रहस्य गहराता है !

मनुज लगाता दौड़ यहॉं की,

हाथ नहीं कुछ पाता है !

कथा, प्रथा है बाँधे रखती,

ध्वजा धर्म की है फहरे !!


मानव जीवन इक रहस्य है,

कौन इसे सुलझा पाया !

भेद पहेली का जाना तो,

लौट नहीं जग में आया !

जितना सधा हुआ है जीवन,

उतना मन भी है निखरे !


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