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anuradha jain

Abstract


4.5  

anuradha jain

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आवारा बदली हूँ यारो

आवारा बदली हूँ यारो

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धुन- मुसाफिर हूँ यारों


आवारा बदली हूँ यारों,

हर कतरा, मेरा ठिकाना

मुझे बहते जाना है,

बस बहते जाना है।


एक बूंद थम गयी,

तो ओस बन गयी,

मैं मुड़ा तो साथ-साथ,

मौसम बादल गए,

आसमां के परे

मेरा आशियाना।


अश्को ने दर्द थामकर,

आँखों में बिठा लिया,

सागर ने अपनी मौज में,

मुझे छुपा लिया

आँखों के सागर से मेरा,

दोस्ताना।



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