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Rekha gupta

Abstract

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Rekha gupta

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रहगुजर

रहगुजर

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तेरी रहगुजर से गुजरे 

तो ये ख्याल आया 

तू साथ नही किन्तु 

तेरी यादो का है नजारा।


कभी खुद से बात की 

कभी तेरी बातो को याद किया 

इस सूनी सूनी रहगुजर में 

बस तेरा दीदार न हुआ।


मेरे दिल की हर धड़कन 

तेरा ही रस्ता तकती है 

मंजिल नजदीक है पर 

बड़ी दुश्वार रहगुजर लगती है।


हर ओर धुंध ही धुंध है 

दिल में तेरी याद का उजाला है 

धड़कनें है थमी थमी सी 

दिल में यादों का शोला है।


चाहत की रहगुजर में 

अक्सर ये अंजाम होता है 

तन्हाई ही तन्हाई हर ओर 

दिल मे एक एहसास पलता है।


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