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Neerja Sharma

Inspirational Others


5.0  

Neerja Sharma

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रेत

रेत

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रेत

हे मानुष

मुझे रौंद कर 

तुम कहाँ जाओगे

अपने पैरों के निशां

मेरे सीने पर ही पाओगे

लौट इक दिन यहीं आना

मेरे हृदय में आ स्वयं को समाना 

धमंड न कर, रेत के निशां सा मिट जाना

ढूँढना चाहे तो भी न ढूँढ पाओगे

अपनी जगह औरों को पाओगे

यह कुदरत का नियम है 

मिटना हर एक को है

मुट्ठी से फिसले

रेत -जीवन

कुछ कर

जाओ।



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