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aazam nayyar

Romance

4  

aazam nayyar

Romance

रब मिला दे

रब मिला दे

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उससे मुझे ही ऐ रब मिला दे 

मेरा सदा अब उसको बना दे 

दीदार अब उसका रब करा दे 


मैं सोचते उसको थक गया हूँ 

बेदार यूं रातों को ही रहा हूँ

मैं उस हंसी से जब से मिला हूँ 

दीदार अब उसका रब करा दे 

ऐ रब मुझे उसका अब पता दे


कोई न उससे शिकवा गिला है

लेकिन वो मुझसे बेखुद मिला है

गुल प्यार उसको मैंनें दिया है

उसको भी मेरी फुरकत सता दे

ए रब मुझे उसका अब पता दे


वो याद आता हर पल रहा है

मुझसे हुआ जीवन भर जुदा है 

बोझिल हुई आँखें यूं सदा 

कोई ऐसी आज़म को दुआ दे 

मेरा सदा अब उसको बना दे।


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