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aazam nayyar

Abstract Action Inspirational

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aazam nayyar

Abstract Action Inspirational

दीपावली

दीपावली

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उसे घर आज अपने ही बुलायेंगे 

उसे ही खीर उल्फ़त की खिलायेंगे 


बढ़ेगा प्यार दीवाली से हर दिल में 

सभी के साथ में दीपक जलायेंगे 


मिटेंगे सब अंधेरे नफ़रतों के ही 

मुहब्बत के यहाँ दीप झिलमिलायेंगे


ढलेंगे दिन वतन से ही गमों के सब 

ख़ुशी हर चेहरे पे ही राम लायेंगे 


दीवाली दे रही पैगाम उल्फ़त का 

घरों पे दीप देखो जगमगायेंगे


भुला दो नफरतें दिल से सभी अपने 

सभी मिल के ही दीवाली मनायेंगे


मुहब्बत का जलाकर दीप ऐ आज़म 

गले इक दूसरे को ही लगायेंगे 




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