फूल से खुशबू
फूल से खुशबू
जीस्त में ग़म और क्या है
आंख ये नम और क्या है
वो नज़र आये न चेहरा
शीशे में हम और क्या है
गांव वो रुख़सत हुआ अब
बात की कम और क्या है
भूलने को मैं उसे ही
पी रहा रम और क्या है
प्यार में आज़म सकूं कब
आंसू बस ग़म और क्या है
आज़म नैय्यर
