रौशनी के लिए
रौशनी के लिए
सुबह दहलीज में
पड़ी अखबार नहीं हूँ मै
पड़ती हो सुबह-सुबह जल्दी में
और शाम को
फ़ेंक देते हो रद्दी के साथ
कैलेंडर भी नहीं हूँ
जो टांगा हुआ है दीवाल के
एक कोने में
और आने-जानेवाली तूफान
पैन खुलती है बंद करती है
अपनी ख़ुशी से
जुड़े में खोंसा
सुन्दर सुगंध फूल भी नहीं हूँ
जो बाजार और मेलों की भीड़ में
गिरकर धूल में मिल जाती है
खिड़की के कांच में
लगा धूल हूँ में
पोंछकर साफ करना होगा तुम्हे
आपने घर में ज्यादा रौशनी की प्रवेश
निरंतर करने के लिए
तुम्हारी समाज की हवेली की
खिड़की की कांच में
लगा अंधविश्वास
और अशिक्षा की धूल हूँ में
साफ करना होगा तुम्हे
समाज की हवेली में
सुख-शांति और शिक्षा की
रौशनी के लिए
