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Sunil Gupta teacher

Abstract

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Sunil Gupta teacher

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राष्ट्रप्रेम गीत (18)

राष्ट्रप्रेम गीत (18)

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देश हमारा मात-पिता है, 

देश हमारा भगवन है।

करे देश से जो गद्दारी, 

काट लाऊं में गर्दन है।


 आन देश की जाँ न पाये, 

चाहे जाये जीवन है। 

देश के खातिर जीना मरना,

 यही हमारा पैशन है।


 धरा के ऊपर देश हमारा,

 ये इतिहास पुरातन है।

 गौरव गाथा इसकी भारी,

 जय करते जग जन - मन हैं।


 नाम हमारा देश से होता,

करता सबका पालन है।

नमक हरामी जो जन करता, 

बनता सजा का भागन है।


 देश रहा तो हम रह जायें, 

करे नियम सब पालन हैं |

देश का जग में गौरव गाये,

चाहे जाये प्राणन है।


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