राष्ट्रप्रेम गीत (18)
राष्ट्रप्रेम गीत (18)
देश हमारा मात-पिता है,
देश हमारा भगवन है।
करे देश से जो गद्दारी,
काट लाऊं में गर्दन है।
आन देश की जाँ न पाये,
चाहे जाये जीवन है।
देश के खातिर जीना मरना,
यही हमारा पैशन है।
धरा के ऊपर देश हमारा,
ये इतिहास पुरातन है।
गौरव गाथा इसकी भारी,
जय करते जग जन - मन हैं।
नाम हमारा देश से होता,
करता सबका पालन है।
नमक हरामी जो जन करता,
बनता सजा का भागन है।
देश रहा तो हम रह जायें,
करे नियम सब पालन हैं |
देश का जग में गौरव गाये,
चाहे जाये प्राणन है।
