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Rajeshwar Mandal

Tragedy

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Rajeshwar Mandal

Tragedy

राजनीति

राजनीति

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 कर्म की कर्मशाला बंद

 धर्म की धर्मशाला बंद

 कोचिंग काॅलेज विद्यालय बंद

 अरदली अफसर का कार्यालय बंद 

 सड़क बाग सब सूना है 

 बैठे बैठे कुछ काम करे 

 चलो सियासत हो जाये 

 मित्रवत से बात शुरू कर 

 जात पात पर अड़ जायें

 राजनीति की आर में 

 लत्तम जूत्तम हो जाये। 


 क्या फर्क पड़ता है 

 कौन जीता कौन हारा 

 कौन मंत्री किसकी सरकार बने

 जो घुमें थे इलेक्सन में गाँव शहर

 वो अब ठोकरें खाये दर बदर 

 सुना है राशन कार्ड बनी है उनकी 

 थे जो गाँव में स्कारपियो वाले ।


 राजनीति एक नशा है 

 जो हर जन के दिलो दिमाग मे बसा है 

 कहीं मूक भी बोल लेते हैं 

 कहीं बधिर भी सुन लेते हैं 

 कोई खुल कर लड़ जाते हैं 

 कोई मौन रहकर लड़ा जाते हैं 

 फिर मौका देख खिसक जाते हैं 

 मरे कटे लड़ने वाले 

 मौनव्रत धारी रपट लिखा आते हैं 

 तंग तवाह हुआ दोनों जितना 

 फायदा हुआ तीसरे को ही उतना। 


 पर बेगारी में 

 बैठे बैठे क्या करे 

 चलो सियासत हो जाये 

 मित्रवत से बात शुरू कर 

 जात पात पर अड़ जायें 

 राजनीति की आर में 

 लत्तम जूत्तम हो जाये।


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