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Rajeev Tripathi

Abstract Inspirational

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Rajeev Tripathi

Abstract Inspirational

क़ाबिलियत

क़ाबिलियत

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ना रंजिश को हवा देते हैं ना दोस्ती निभाते हैं

चंद लोग मेरे सामने मुझको ही गिराते हैं 

तारीफ़ की हमें भी कोई आरज़ू नहीं है 

वह क्या उठाएंगे हमें नज़रों से जो गिराते हैं

गलतियांँ अपनी देखना फ़िर मुनासिब कहांँ

उंगलियांँ जो ग़ैर पर लोग उठाते हैं


बहुत दिनों से किसी ने मुझे बुरा नहीं कहा

हम अपने घर से भी ना निकले

शायद लोग यही चाहते हैं

हमारी क़ाबिलियत पर शक

उन्हें पहले भी नहीं था

अफ़साना मेरी बात का जो रोज़ बनाते है

तारीफ़ मेरी उनके मुंँह से निकलती ही नहीं

शायद यही वज़ह है कि मेरी गलतियांँ

गिनवाते हैं


अच्छा है वो लोग ख़ूब तरक़्क़ी करें

बहाना जो मेरी नाकामी का रोज़ बनाते हैं

बड़े ख़ुद-ग़रज़ लोग हैं उन्हें मेरी ग़रज़ क्या

अपनी ही तरक़्क़ी पर जो लोग इतराते है

ग़ैर मौजूदगी में करते हैं लोग मेरी बुराई 

तन्हा ही लोग अक्सर गंगा नहाते हैं 


बुराई करना सबकी बुरी बात है लेकिन 

क्यों ख़ामख़ाह दूसरे की क़ाबिलियत पर 

लोग उंगलियांँ ही उठाते हैं।


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