Ms. Nikita
Classics
क्यों तू मानव
प्यासा रे !
यहाँ-वहाँ क्यों
भागा रे !
कब तक भाग्य
तेरा रहेगा
कब तक
साथी-सखा सहेगा
पूर्ण रूप से
तू निर्भय है
आशा रुपी
तू विरले है
विरल नाम तेरा
काम आएगा
जब तू
संपूर्ण बन जाएगा।
आत्मघात
दो पल
प्रमाण
अनुमति
जाने कहाँ गए ...
जैसे-तैसे
जीवित जीवन
क्या हुआ
तैयारी
व्यक्त कर
आ सामने, कर सहायता मैं तो एक अदना यह सारी है तेरी बुनी कहानी। आ सामने, कर सहायता मैं तो एक अदना यह सारी है तेरी बुनी कहानी।
खुद को गुलामी के पिंजरे से आज़ाद करते हैं, चल खुद पर कुछ विश्वास करते हैं। खुद को गुलामी के पिंजरे से आज़ाद करते हैं, चल खुद पर कुछ विश्वास करते हैं।
अफवाहें है ये जब मिलेगी तो वाह भी नही कह पाओगे। अफवाहें है ये जब मिलेगी तो वाह भी नही कह पाओगे।
तेरी यादों को तेरी यादों को
प्या रभरी बातों, मुलाकातों और, अपनेपन की खुशबूओं से महकाएं।। प्या रभरी बातों, मुलाकातों और, अपनेपन की खुशबूओं से महकाएं।।
पालन करने को बचन, पितु के श्री रघुनाथ । लखन सिया के सहित प्रभु, कीन्हो अवध अनाथ ।। पालन करने को बचन, पितु के श्री रघुनाथ । लखन सिया के सहित प्रभु, कीन्हो अवध अन...
हम जिए कुछ ही साल पर याद रखें लोग हजारों साल। हम जिए कुछ ही साल पर याद रखें लोग हजारों साल।
सदाचार अपनाएं और, जीवन को रखें सादा, भागेंगे सकल गम और, मिलें खुशियां ज्यादा। सदाचार अपनाएं और, जीवन को रखें सादा, भागेंगे सकल गम और, मिलें खुशियां ज्यादा।
आसमां को गुंजायमान करते वापस बस जाते हैं। आसमां को गुंजायमान करते वापस बस जाते हैं।
अपने अस्तित्व से बिछड़कर भी दुनिया का अस्तित्व समझा नहीं, गिरता पत्थर। अपने अस्तित्व से बिछड़कर भी दुनिया का अस्तित्व समझा नहीं, गिरता पत्थर।
धूमिल नहीं होतीं वो अल्हड़ यादें उनमें आज भी वही ताज़गी है ! धूमिल नहीं होतीं वो अल्हड़ यादें उनमें आज भी वही ताज़गी है !
आँखें मूंद देखना चाहता जब कभी उभर आती हैं वो दर्द तकलीफें भी।। आँखें मूंद देखना चाहता जब कभी उभर आती हैं वो दर्द तकलीफें भी।।
इतनी खामोशी से लफ्ज़ों को संभाला है "पवन", हर जुबां पर तुम्हारी ग़ज़लें चल रही हैं। इतनी खामोशी से लफ्ज़ों को संभाला है "पवन", हर जुबां पर तुम्हारी ग़ज़लें चल र...
तुझसे नाराज़ नहीं ज़िन्दगी कोई शिकायत नहीं और कोई पछतावा नहीं। तुझसे नाराज़ नहीं ज़िन्दगी कोई शिकायत नहीं और कोई पछतावा नहीं।
मुुुुठ्ठी में रेत की भांति फिसलते जा रहें हैं, लगता है हम बदल रहें हैं। मुुुुठ्ठी में रेत की भांति फिसलते जा रहें हैं, लगता है हम बदल रहें हैं।
ब्रज की बाँसुरी मेटल डिटेक्टर की सूली पर चढ़ी है। ब्रज की बाँसुरी मेटल डिटेक्टर की सूली पर चढ़ी है।
उस ख़्वाहिश का तलबगार कभी हुआ ही नहीं। उस ख़्वाहिश का तलबगार कभी हुआ ही नहीं।
वीरता के परिचायक, अनन्त ज्ञानवान , उदित हुए जो बनकर मेवाड़ की शान । वीरता के परिचायक, अनन्त ज्ञानवान , उदित हुए जो बनकर मेवाड़ की शान ।
अपने हीं अश्रुजल से अपने आप को नहलाता हूँ हाँ मैं दोषी कहलाता हूँ ! अपने हीं अश्रुजल से अपने आप को नहलाता हूँ हाँ मैं दोषी कहलाता हूँ !
हथेली पर उभरती मिटती कोई लकीर है। हाँ ये बंधी हुई कोई जागीर है। हथेली पर उभरती मिटती कोई लकीर है। हाँ ये बंधी हुई कोई जागीर है।