STORYMIRROR

Ms. Nikita

Classics

3  

Ms. Nikita

Classics

प्यासा

प्यासा

1 min
74

क्यों तू मानव

प्यासा रे ! 

यहाँ-वहाँ क्यों

भागा रे ! 


कब तक भाग्य

तेरा रहेगा

कब तक

साथी-सखा सहेगा


पूर्ण रूप से

तू निर्भय है

आशा रुपी

तू विरले है


विरल नाम तेरा

काम आएगा

जब तू 

संपूर्ण बन जाएगा।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Classics