STORYMIRROR

Avinash Soni

Abstract Others

3  

Avinash Soni

Abstract Others

प्यास

प्यास

1 min
196

उसके लबों से अल्फ़ाज़ नहीं

बंजर ज़मीन की प्यास बुझाने वाली

बारिश की बूंदें बरसा करती है, 

जिन्हें भिगोना आता है, 

बहुत भिगोना..


मैं तो उन बारिशों में

अपनी आत्मा को भिगो आता हूँ, 

फिर उसे सुखाने के लिए

तुम्हारी गर्म श्वास के हवाले कर देता हूँ 

गीली आत्माओं में ज्यादा प्रकाश नहीं होता, 

वो तुम्हारे अंदर छिपे अंधकार में खोना चाहती है


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract