STORYMIRROR

Avinash Soni

Others

3  

Avinash Soni

Others

क़ैद

क़ैद

1 min
208

तुमने पिंजरे में क़ैद परिंदा को देखा है

फड़ फड़ कर फड़फड़ाता है, 

मेरे अंदर भी एक परिंदा है, 

मेरे मन का परिंदा 

झिक झिक कर झकझोरता है 

दोनों परिंदे सोचते है कि

एक को उसकी सुंदरता ने क़ैद किया

और दूसरे को उसकी जिज्ञासा ने क़ैद किया 

दोनों परिंदे आज़ाद होना चाहते है,

बोलो तुम आज़ाद करोगे?


Rate this content
Log in