STORYMIRROR

Reena Devi

Romance

3  

Reena Devi

Romance

प्यार या आकर्षण

प्यार या आकर्षण

1 min
197

कैसे कहूँ मैं दिल की बात सखी

रहने आया पड़ोस में हम जात सखी


वो काम सीखने आया था ,

पर मन को मेरे भाया था।

देखूं ना तो बने ना बात सखी,

कैसे कहूँ मैं दिल की बात सखी।


कभी भीतर कभी बाहर आऊं,

हरपल उसको देखना चाहूं।

कैसे जगे दिल मैं जज़्बात सखी,

कैसे कहूँ मैं दिल की बात सखी।।


एक दिन वो बाहर ही ना आया,

मन ने मुझे बेबस बनाया।

हुए दुश्वार दिन रात सखी,

कैसे कहूँ मैं दिल की बात सखी।।


ये प्यार था या नादानी थी,

सपना था या कहानी थी।

सुलझाए ना सुलझे सवालात सखी

कैसे कहूँ मैं दिल की बात सखी।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance