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Sachhidanand Maurya

Abstract

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Sachhidanand Maurya

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प्यार मोती है सागर की गहराई नापो

प्यार मोती है सागर की गहराई नापो

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नैनों के चितवन को तो नैनों से भांपों,

प्यार मोती है सागर की गहराई नापो।


खिलता है दिल में तो दिल में उतरना,

वादे निभाना तुम कभी मत मुकरना।


प्रेम पावन है इसकी पावनता से प्यार करना,

ये सब्र की चीज है तो इसका इन्तजार करना।


इसमें नैनों से जो बहता उसको नीर कहते हैं,

जब दिल टूटता है तो इसको पीर कहते हैं।


मोहब्बत कर लेते लोग निभा नहीं पाते,

ऐसे लोग मोहब्बत को बता नहीं पाते।


प्रेम में हर पल नशा रहता है,

प्रेम दो दिलों में बसा रहता है।


प्रेम है तो हर खुशी है,

प्रेम ही तो जिंदगी है।



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