प्यार करके देखो ज़रा
प्यार करके देखो ज़रा
तुम भी किसी से प्यार करो,
तब !देखो अपने आंखो में आंसू।
कभी सिसक- सिसक कर रोना पड़ता है,
कभी झरना जैसा बहता है आंसू।
आंसू तो कुछ नहीं बोलता, वो तो बहता है,
बस जलता है दिल, जुदाई के लपट से।
टूट जाते हैं बंधन, प्यार के जब,
तन्हाई होकर रोना पड़ता है, तड़प से।
मिट जाते हैं सारे शिकवे, उनसे कुछ कहने को,
भूल जाते हैं उसी गम में, रो- रोकर।
उनकी परछाई ख्वाबों में छूट जाती है,
बस मुश्किल से राते काटनी पड़ती है, सुलग- सुलगकर।
मिट जाते हैं सब भूख प्यास,
उनको ही याद करने पर, जो चला गया।
नम ना होती है आंखे, उनसे दूर होने पर।
निगाहों में वो बस जाता है, जो दूर हो गया।
कुछ कहता है दिल कि उससे मिलूं,
सामने आए वो मुसाफ़िर, बस उसे ही देखता रहूं।
पल भर के लिए मुझसे दूर ना जाए,
कोई भी बातें हो जिंदगी में, बस उससे ही कहता रहूं।
