STORYMIRROR

Krishnakant Prajapati

Romance

3  

Krishnakant Prajapati

Romance

प्यार की मिसाल

प्यार की मिसाल

1 min
250

कुछ यूँ आजमाईशें कर रहा है ये मेरी ज़माना

हाथ में कंघी है पर सिर पर बाल नहीं


कैसे कहूँ कि मैं अब भी जिंदा हूँ

शारीर में हड्डी तो है पर वो खाल नहीं


मैंने भी देखी है वो शान-ओ-शौकत

और उसे खोने का मुझे कोई मलाल नहीं


मलाल जिस चीज का है बताता हूँ.....


सोचा था बिताऊंगा उसे साथ ज़िन्दगी सारी

लेकिन ये ख्याल रह गया मेरे ख़याल में ही


यूँ तो भुला दी है सारी यादें उसकी दिल से

पर अब भी मैंने रखा है संभाल कर उसका

रुमाल कहीं


आगे बढ़ने की कोशिश हर रोज़ होती है

लेकिन फिर सामने आ जाता है सवाल वहीं


क्या वो अब भी मेरे इंतज़ार में है

या किसी और के लिए बन गयी है सच्चे प्यार

की मिसाल कहीं



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance