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Supriya Devkar

Romance

3  

Supriya Devkar

Romance

प्यार की छाँव में

प्यार की छाँव में

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237


प्यार की छाँव में 

आ गये हम फिर से 

ना जाने अरसा हुआ 

बिछड़े थे तुमसे 

हवा के झोंके के साथ 

पुरानी यादों को लेकर

चल दिए हम भी 

हाथों में हाथ डालकर 

खुशियों ने दी दस्तक 

हम फूले नहीं समाये

तुम्हारे सिवा ना जाने 

कितने गोते हमने खाये 

अब ना कोई फिकर है 

ना कोई है गम 

शिकायतों को कर अलविदा 

जख्म हो जायेंगे कम



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