STORYMIRROR

S Ram Verma

Abstract

4  

S Ram Verma

Abstract

प्यार का बंधन !

प्यार का बंधन !

1 min
605

मुझे नहीं चाहिए वकृत 

मानसिकता वाली आज़ादी 

मुझे आदत उस सुख की है

मुझे उस सुरक्षा की जरुरत है 


जो तेरे अपनेपन और तेरे 

प्यार के बंधन में मिलती है 

जो मुझे और किसी की नज़र 

में ऊँचा स्थान भले ही ना 


दिलाये पर तेरे दिल में वो  

स्थायित्व सदा दिलाता है  

मुझे बिलकुल जरुरत नहीं है 


उस आभाषी आज़ादी की जो 

मुझे स्वच्छंदता में डुबो दे  

तुम्हारे प्यार के अटूट और  

अकाट्य बंधन में मैं आकंठ 

डूबी रहना चाहती हूँ !


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract