STORYMIRROR

Supriya Devkar

Romance

4  

Supriya Devkar

Romance

प्यार ही था मगर

प्यार ही था मगर

1 min
228

प्यार ही था मगर 

ना हो चुका हमारा 

रास्ते हो गये अलग 

यादो का था सहारा 


मन से मिला था मन

ना आकर्षण था कोई 

एक दूसरे के सुख मे 

दुखी नही था कोई 


जिदंगी ने सिखाया था

पाठ प्यार का जतन से 

हमने तो बस सबक सीखा 

हर हाल मे खुश रखना है उसे


उसकी एक याद 

मुस्कुराहट लाती है आज भी

हम नही होते नाराज 

सच्ची मोहब्बत है आज भी ।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance