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Supriya Devkar

Romance

4  

Supriya Devkar

Romance

प्यार ही था मगर

प्यार ही था मगर

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प्यार ही था मगर 

ना हो चुका हमारा 

रास्ते हो गये अलग 

यादो का था सहारा 


मन से मिला था मन

ना आकर्षण था कोई 

एक दूसरे के सुख मे 

दुखी नही था कोई 


जिदंगी ने सिखाया था

पाठ प्यार का जतन से 

हमने तो बस सबक सीखा 

हर हाल मे खुश रखना है उसे


उसकी एक याद 

मुस्कुराहट लाती है आज भी

हम नही होते नाराज 

सच्ची मोहब्बत है आज भी ।



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