STORYMIRROR

Shailendra Kumar Shukla, FRSC

Abstract

4  

Shailendra Kumar Shukla, FRSC

Abstract

पुरानी य़ादे

पुरानी य़ादे

1 min
272

पुरानी यादें आती हैं 

कहानी यूँ दोहराती हैं

पथिक यूँ मुड़ कर देखे 

निशानी फिर सताती है !


हारे हुए पथिक औ 

नाकाम ज़िन्दगी हो 

आगोश में यूँ हो तो,

एहसान किसका होगा !


कठिन राह से गुजर गये 

उनकी आह से संभल गये 

अवसाद किस बात का 

अवसान से तो निकल गये !


वक़्त है, ठहर जाए

सख्त है, अखर जाए

तनिक अवशेष न देखें

नादानी फिर दिखाती है !!



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract