Pradeep Pokhriyal
Tragedy Fantasy Inspirational
लौटकर वापस आ आऊंगा,
ऐसा भरम मत रखना।
आया था एक रोज़,
तुम्हारी देहरी पर।
उठाया नहीं था,
बहाया था तुम्ही ने।।
चाँद चाहिए था तुम्हें,
ध्रुव को धिक्कार दिया।
अब चिल्लाओ महल की भीतों पर,
बनाया था तुम्ही ने ।।
प्रत्यंचा
पुकार
अपने
मेरी आवाज
एतबार
अभिनय
पेड़
कल्पना
मान्यता
अविनाशिनी
चीख उठी है स्वयं वेदना, देख क्रूरता के मंजर । चीख उठी है स्वयं वेदना, देख क्रूरता के मंजर ।
हर प्राणी बेचैन है, धरती हुई अधीर। इंद्रदेव कर के कृपा, बरसा दो कुछ नीर।। हर प्राणी बेचैन है, धरती हुई अधीर। इंद्रदेव कर के कृपा, बरसा दो कुछ नीर।।
यही फलन है जब नवपीढ़ी आँसू से सन जाती है सहिष्णुता जब हद से बढ़ती कायरता बन जाती है ... यही फलन है जब नवपीढ़ी आँसू से सन जाती है सहिष्णुता जब हद से बढ़ती कायरता बन जाती ह...
कितने अपनों को उड़ा गई, यह कैसी हवा चली, देखो!! कितने अपनों को उड़ा गई, यह कैसी हवा चली, देखो!!
मरते रहे मरीज़, अव्यवस्थाओं का शोर था, ये देश रो रहा था,बस तूफानों का दौर था. मरते रहे मरीज़, अव्यवस्थाओं का शोर था, ये देश रो रहा था,बस तूफानों का दौर था.
हे प्रकृति की मासूम प्रतिनिधि! हम तुम्हारे अपराधी हैं.. हे प्रकृति की मासूम प्रतिनिधि! हम तुम्हारे अपराधी हैं..
हृदय का तुमको दान दिया था, जीवन तुममें जान लिया था हृदय का तुमको दान दिया था, जीवन तुममें जान लिया था
सात दिनों के सात रंग में रंगी हुई इसकी प्रेम कहानी है। सात दिनों के सात रंग में रंगी हुई इसकी प्रेम कहानी है।
कानून अब जी हजूरी की भाषा के अतिरिक्त कुछ नहीं। कानून अब जी हजूरी की भाषा के अतिरिक्त क...
अब स्वतंत्र है वो तो पराश्रित मैं भी नहीं इस अर्थहीन पानी का अर्थ कुछ भी नहीं। अब स्वतंत्र है वो तो पराश्रित मैं भी नहीं इस अर्थहीन पानी का अर्थ कुछ भी नहीं...
इबादत में हमारी असर नहीं रही या ईश्वर ने आँखें बंद कर रखी है। इबादत में हमारी असर नहीं रही या ईश्वर ने आँखें बंद कर रखी है।
कुछ बीती बातें हैं मन में, कब से जी रहा था कल में। कुछ बीती बातें हैं मन में, कब से जी रहा था कल में।
तुम किसे छोटी सी बात कहते हो? तुम किसे छोटी सी बात कहते हो?
आप तो सोते में भी अयोध्या धाम टहल रहे हो और मेरी हालत समझने से पल्ला झाड़ने का जुगत आप तो सोते में भी अयोध्या धाम टहल रहे हो और मेरी हालत समझने से पल्ला झाड़न...
कुछ विनष्ट करते हैं और सृष्टि तटस्थ रहती है! कुछ विनष्ट करते हैं और सृष्टि तटस्थ रहती है!
द्रास चोटी पर विजय पर एक युद्धदृश्या - एक सजीव चित्रण द्रास चोटी पर विजय पर एक युद्धदृश्या - एक सजीव चित्रण
मैं नहीं जाना, प्रभुजी तेरी दुनिया में। नज़रों से तीर छूटेंगे मैं , ... मैं नहीं जाना, प्रभुजी तेरी दुनिया में। नज़रों से तीर छूटेंगे मैं , ...
दूसरी कमला देवी "बेलदारी" करती है उसका पति भी वहीं "चिनाई" करता है। दूसरी कमला देवी "बेलदारी" करती है उसका पति भी वहीं "चिनाई" करता है।
मुझे लगता है यह जीवन रंगमंच है और मैं बस एक कुशल अभिनेत्री हूँ। मुझे लगता है यह जीवन रंगमंच है और मैं बस एक कुशल अभिनेत्री हूँ।
आखिर क्यों लाखों परिवार न्याय से वंचित रह जाते है। आखिर क्यों लाखों परिवार न्याय से वंचित रह जाते है।