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Dr. Chanchal Chauhan

Abstract

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Dr. Chanchal Chauhan

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पत्नी हो गई मैं

पत्नी हो गई मैं

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देखो पत्नी हो गई मैं

बेटी से पत्नी बनने मैं

मैं अपने नखरे 

अपने रूठने के अंदाज़ 

खो चुकी हूं मैं


किसी से नाराज़ होने का

 हक़ कहाँ है मुझे 

पत्नी हो गई हूँ ना 

 मनाते तो पापा थे माँ थी

 आगे पीछे लगे रहते थे

प्यार से लाड़ से 

अपना बना लेते थे


माँ आगे पीछे 

खाने की थाली 

लेकर घूमती रहती 

पापा हँसाते रहते

ससुराल में 

कभी नाराज़ हो जाऊं

 तो खाना छोड़ देती हूँ

 फ़िर ख़ुद ही ख़ा भी लेती हूँ


पता है कौन मनाएगा मुझे

कौन नखरे उठायेगा मेरे

 पतिदेव हाल पूछ लें

 उनका ग़रूर न टूट जाएगा

 पत्नी हो गई हूँ ना 

अब नाराज़ होने का हक़

 कहाँ है मुझे


 काश 

सोचती हूँ वो क्या दिन थे मेरे

मैं राजकुमारी अपने माँ बाप की थी

अब पत्नी हो गई मैं

जिम्मेदारी और कर्त्तव्य की

कर्तव्यनिष्ठ हो गई हूं मैं।


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