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Manoj Godar

Romance

4  

Manoj Godar

Romance

पतझड़ है मेरा जीवन

पतझड़ है मेरा जीवन

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उस बेवफा का हर पल , मुझे इन्तजार क्यों है। 

तोडा है जिसने दिल को मुझे उससे प्यार क्यों है। 


वो ले गया है मेरा चैन और सुकुन सब कुछ

उस संगदिल की खातिर दिल बेक़रार क्यों है। 


ना खिलेंगी कभी कलियाँ अब मेरी हसरतों की 

फूलों की जगह मुझको काँटों के हार क्यों है। 


देखा ना जिसने मुझको एक बार भी पलटकर 

उसकी बस एक झलक को नजरें निसार क्यों हैं। 


अपना समझ के उसको खाये है जख्म दिल पर 

पतझड़ है मेरा जीवन उसको बहार क्यों है। 


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