STORYMIRROR

Hardik Mahajan Hardik

Classics

2  

Hardik Mahajan Hardik

Classics

पता नही

पता नही

1 min
75

पता नही उसका कब किसी

मोड़ पर जाना था,

वक्त गुजरता चला गया हर

मोड़ पर जिसका था।

समय के साथ फिर समय

स्थिर नहीं रहा,

जाने अनजाने हर समय 

का कब मिला था।

बढ़ता गया कारवाँ उसका

हर मोड़ पर,

जब क़लम और स्याह का

निभाया साथ था।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Classics