प्रवाह है
प्रवाह है
समय प्रवाहित हो रहा है
जीवन में
और अस्तित्व में भी
लगता है हम ठहरे हुये हैं
और समय सरकता हुआ
बहता जा रहा है।
समय पलों का झुंड
फिर भी एक पल
वापस आने वाला नहीं है जीवन में
पर आ भी रहा है पल ही
एक नया।
हवा सहचर है समय की
बह रही है जीवन में
और अस्तित्व में भी
जीवन मे श्वांस की तरह
और अस्तित्व में कहानियों की तरह
और हर कहानी शुरू होती है
एक समय की बात है
जब की एक कहानी बन रही है
अभी अभी
जीवन में आये हुये पल के साथ
और बह रही है अस्तित्व में
समय के साथ साथ।
बनती हुयी कहानी का आधार है
मनुष्य की जिम्मेदारी और
उसके निर्वहन का प्रभाव।
जैसे शब्द अपनी जगह से
हट रहे हैं
नये शब्द आ रहे हैं उनकी जगह
और
कहानियों के झुंड में
एक और कहानी उग रही है
कितना अच्छा लग रहा है
कहानियां सुनते हुये
एक और नयी कहानी का निर्माण
देखना और उसका हिस्सा बनना।
