प्रथम सीडीएस
प्रथम सीडीएस
भारतीय सेना के परिवार में जन्मा
उत्तराखंड के पौड़ी में रहता था
ऐसा वीर सपूत जवान,
खड़कवासला पहुंचा भरी जवानी में
करने सपना पूरा अपने परिवार का
लिया कमीशंड उसी बटालियन
जिसको कमांड किया पिता ने
चला उस पथ पर जिस पर
अनेक वीरों ने जान गवाई थी
करने सपना पूरा अपने परिवार का
कभी करता लड़ाई चीन से
तो कभी चढ़ाई म्यांमार पे
चलते-चलते पहुंचा थल सेना पद पर
जिसका सपना होता हर जवान का
करने सपना पूरा अपने परिवार का
बन गया वह एक दिन
तीनों सेना का सेनापति
करने सपना पूरा जब थल, जल और वायु
एक हो जाएं भारत माता की रक्षा को
करने सपना पूरा अपने परिवार का
छाती ढक गई पदकों से
दुश्मन के किए हौंसले पस्त
चार दशकों की कड़ी मेहनत
रंग लाती दिख रही थी जब
करने सपना पूरा अपने परिवार का
हुए सवार् थे चीते चॉपर पर
जब चकमा दिया मौत को
नागालैंड की पहाड़ियों पर
कहता था- मैं ना मरूंगा इतने से
करने सपना पूरा अपने परिवार का
उड़ा एक दिन छूने
आसमान की ऊंचाइयों को
लिए साथ में अर्धांगिनी और
बारह वीर जवानों को
करने सपना पूरा अपने परिवार का
मध्य में ही हुआ ध्वस्त MI-17 चॉपर
कूनूर, नीलगिरी की पहाड़ियों पर
हुए वीरगति को प्राप्त, लेकर वीर जवानों को
करने सपना पूरा अपने परिवार का।
