प्रसारण-मृषा छंद
प्रसारण-मृषा छंद
जीवन में तुम पाठ करो ,
सच्चाई को सुधारण ।
झूठ कभी मत बोलो तुम,
बात बनेगी अकारण।।
वीरों की गति समझो तुम ,
पीला चोला कर धारण ।
जान लुटा देते अपनी,
करते कभी न प्रसारण ।।
मनवा सबका पावन हो, वेद-शास्त्र का प्रसारण ।
संस्कारों की बात करें ,करना फिर से निवारण ।।
जीवन की हर सच्चाई , आती सम्मुख अचानक ।
करो प्रेम जग में सबसे, ऐसा सुन्दर कथानक ।।
दुख -सुख आना जाना है,
घबराना क्यों अकारण।
सच्चा मन पावन करना,
हो जायेगा सुचारण ।।
