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Saroj Garg

Abstract

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Saroj Garg

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प्रसारण-मृषा छंद

प्रसारण-मृषा छंद

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जीवन में तुम पाठ करो ,

सच्चाई को सुधारण ।

झूठ कभी मत बोलो तुम,

बात बनेगी अकारण।।


वीरों की गति समझो तुम ,

पीला चोला कर धारण ।

जान लुटा देते अपनी, 

करते कभी न प्रसारण ।।


मनवा सबका पावन हो, वेद-शास्त्र का प्रसारण ।

संस्कारों की बात करें ,करना फिर से निवारण ।।


जीवन की हर सच्चाई , आती सम्मुख अचानक ।

करो प्रेम जग में सबसे, ऐसा सुन्दर कथानक ।।


दुख -सुख आना जाना है, 

घबराना क्यों अकारण। 

सच्चा मन पावन करना, 

हो जायेगा सुचारण ।।



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