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ADITYA MISHRA

Abstract

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ADITYA MISHRA

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प्रकृति

प्रकृति

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प्रकृति की हर छटा निराली

सुंदरता से सभी को अचंभित कर डाली,

धरा को जब प्रभु ने था बनाया

स्वर्ग सा ही श्रृंगार किये थे।


कोयल की संगीत बजी है

फूलों से बाग सजी है,

बीती रात कमल दल फूले

रंग देख प्रकृति के मन है झूमे।


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