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Rashi Saxena

Inspirational

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Rashi Saxena

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प्रकृति का आभार

प्रकृति का आभार

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 प्रकृति का आभार हरी भरी चादर बिछने दो

मातृभूमि का ऋण वृक्षारोपण से चुकने दो

फले आम अमरूद पपीता सीताफल 

चीकू जामुन बेर इमली लदने दो

प्रदुषण के दूषण जैसे राक्षस का विनाश होने दो 

कार्बन की जहरीली गैस वातावरण से हटने दो 

वंश वृद्धि की चिंता हर प्राणी को पृथ्वी पर

भविष्य में स्वच्छ प्राण वायु हो उपलब्ध 

आज का सद्कर्म अच्छी फसल का रोपण है 

जो आने वाली नस्ल की सुरक्षा की जवाबदेही हो 

सीमेंट की इमारतों के जंगल में हो हरियाली 

घना अरण्य बाघ बगीचा उपवन कानन 

वृक्षारोपण से सूखा अनावृष्टि को मिटने दो 

मृदा कटाव एवं अपरदन खतरा भी टलने दो 

प्रयास परस्पर से करें वनोन्मूलन की रोकथाम

हर जन्मदिन पर पौधरोपण करो एक या दो 

धरती पर हरियाली का रंग फिर से चढ़ने दो 

मातृभूमि का ऋण वृक्षारोपण से चुकने दो 

धरती पर हरियाली का रंग फिर से चढ़ने दो।

 


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