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Mamta Singh Devaa

Inspirational


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Mamta Singh Devaa

Inspirational


" परिवर्तन एक पिता का "

" परिवर्तन एक पिता का "

1 min 303 1 min 303


हर बार बार - बार हमें

माँ तुम ही दुलारती थी ,

जब भी डर जाते थे हम

तो अपने आँचल में छुपाती थी,

हमें जन्म से आदत थी तुम्हारी

तुम्हारे प्यार ने जड़ों को सींचा है हमारी ,

लाड़ - प्यार का पर्यायवाची थी तुम

हमारे जीवन में अभिलाषी थी तुम ,

ममता शब्द को कोई तुमसे अलग न कर पाया

हमने हमेशा तुम्हें इस शब्द से घिरा पाया ,

तुम्हारे बिना जीवन सोचना भी दुश्वार है

तुम नही हो तो जीवन में नही प्यार है ,

एक बात तुम्हें बताते हैं माँ

एक राज़ तुम्हें जताते हैं माँ ,

तुम क्या गई जीवन बे - साया हो गया

कष्टों का हमारे जीवन में फरमाया हो गया ,

लेकिन पता है तुम्हें क्या हुआ 

हमारे घर में एक फरिश्ते का उदय हुआ ,

वो पिता रूपी फरिश्ते जो हमसे दूर रहते थे

तुम्हारे रहते ताड़ से अकड़े -तने रहते थे ,

आज वो पिता बरगद बन गये हैं

हमारे उपर तंबू से तन गये हैं ,

हम उसके प्यार के साये में सुरक्षित हैं

उसका ये प्यार देख कर अचंभित हैं ,

माँ तुम चिंता ना करना 

जहाँ हो वहाँ आराम से रहना ,

तुमने हमें गर्भ में रखा था

नौ महीने में प्यार वो पनपा था ,

तुम्हारे जाते ही एक और गर्भ मिल गया हमें

तुमने अंदर तो इन्होंने बाहर से सहेजा है हमें ।



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