STORYMIRROR

Shringarika Arya

Inspirational

3  

Shringarika Arya

Inspirational

द्रौपदी

द्रौपदी

1 min
211

वो दाव पाशा का खेला था,

जब आर्यवत की रानी को 

वो बाल पकड़ कर लाया था,


दुर्योधन के दुस्साहस ने सीमा सारी लांघी थी,

चीर हरण का देख ज़माना,

द्रौपदी बेचारी थी,


अंधा राजा बहरी सभा, पांडव भी तो मौन है 

कुरूवंश के पुत्रवधू,

 की लाज का साथी कौन है ?


लिए आंखों में शर्म की...

अब गोविंद कब आयेंगे

दुश्शासन दरबरों से,

 कैसे मुझे बचाएंगे ?



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational