परिवार
परिवार
विविधताओं से भरी इस दुनिया में, हैं बिखरे रंग हजार।
किसी के लिए फूलों का उपवन, किसी के लिए ख़ारजार।
रंगमंच बनाया ऊपर वाले ने, हम सब उनके क़िरदार।
आँखों में समा न पाता, दुनिया का है अनन्त विस्तार।
ख़ुशियाँ थिरकती आँगन में, रिश्तों का अनमोल उपहार।
मिलना बिछुड़ना, ग़म ख़ुशी, माया मोह से सजा बाज़ार।
प्यार अपनत्व महके जहाँ, ख़ुशहाल रहता वो परिवार।
सह लेते दुख सब मिलकर, जब पड़े वक़्त की मार।
जीवन है वरदान प्रभु का, करते रहे चलो परोपकार।
मानवता का धर्म निभाएँ, परिवार सिखाता संस्कार।
