Anita Chandrakar
Romance
लो फिर आ गया बसंत
तुम कब आओगे।
सरसों मुस्कुराने लगी खेत में
अलसी भी निखर गई।
सेमल का रंग हो गया गहरा लाल
बौर की महक बिखर गई।
लद गए टेसू फूलों से
धूप भी है खिली खिली
मौसम लगा गुनगुनाने।
आ जाओ प्रिये बसंत की तरह
मुझे भी गीत सुनाने।
गुरु
युद्ध
कोशिश
अंर्तमन
होली
होली रंगों का...
शिव
बसंत
स्वर्ग से बढ़क...
दिव्यांग
मेरे अल्फाज़, तेरे हैं मेरे जज्बात, तेरे हैं। मेरे अल्फाज़, तेरे हैं मेरे जज्बात, तेरे हैं।
सोचा निकल मैं जाऊँ तेरी जिंदगी से हमदम ख्वाबों में आकर तूने, मुझे रात भर जगाया सोचा निकल मैं जाऊँ तेरी जिंदगी से हमदम ख्वाबों में आकर तूने, मुझे रात भर जगाय...
गीत लिखूं, ग़ज़ल लिखूं तुम ही बताओ अब क्या लिखूं ? गीत लिखूं, ग़ज़ल लिखूं तुम ही बताओ अब क्या लिखूं ?
तुम हमारे पास थीं, सब कुछ हमारे पास था तुम हमारे पास थीं, सब कुछ हमारे पास था
सदियों से इश्क़ है हम को उनसे, सदियों से इश्क़ है हम को उनसे,
बहुत कुछ कहना है तुम्हारे कँधे पर ठोड़ी टिकाकर तुम्हारे कानों में....... बहुत कुछ कहना है तुम्हारे कँधे पर ठोड़ी टिकाकर तुम्हारे कानों में.......
मैं कड़वी नीम सी; तुम मधुर शहद। मैं कड़वी नीम सी; तुम मधुर शहद।
गुमसुम से है बैठे हम सुकून के कुछ पल दे दो ना तुम गुमसुम से है बैठे हम सुकून के कुछ पल दे दो ना तुम
प्यार उसे भी हो मुझसे यही दुआ तुम भी करो यार। प्यार उसे भी हो मुझसे यही दुआ तुम भी करो यार।
जब तक तू न था मैं था कोरा कागज तेरे आने से ही भर गया दिल का कागज। जब तक तू न था मैं था कोरा कागज तेरे आने से ही भर गया दिल का कागज।
अब मुंह पर अब हम भी हंसी का नकाब ओढ़े हैं... अब मुंह पर अब हम भी हंसी का नकाब ओढ़े हैं...
पर क्या तुम्हें इस बात से इक़रार है। पर क्या तुम्हें इस बात से इक़रार है।
क्योंकि मैं वह चांद हूं। जिसेे सारा दुनिया देखती है पर कोई पा नहीं सकता ! क्योंकि मैं वह चांद हूं। जिसेे सारा दुनिया देखती है पर कोई पा नहीं सकता !
मेरा तो सावन सूखा है हर पल बरस के अब और ना तड़पा तू एक पल । मेरा तो सावन सूखा है हर पल बरस के अब और ना तड़पा तू एक पल ।
सुना है तेरे चाहने वाले हजारों हैं मैंने भी अपना नाम शामिल किया है । सुना है तेरे चाहने वाले हजारों हैं मैंने भी अपना नाम शामिल किया है ।
धड़कन मे दिल है धड़कन मे दिल है
तलब करें जो तू कभी मैं अपनी आँखें भी तुमको दे दूँ, तो क्या हुआ की मैं अब तेरी निगाह मे तलब करें जो तू कभी मैं अपनी आँखें भी तुमको दे दूँ, तो क्या हुआ की मैं अब तेरी...
नीम फूल से नाजुक है हालात नीम फूल से नाजुक है हालात
बस मात खा जाते बस मात खा जाते
ज़िन्दगी इस कदर मजबूर कर देगी कभी सोचा न था ! ज़िन्दगी इस कदर मजबूर कर देगी कभी सोचा न था !