STORYMIRROR

स्वाती गुप्ता

Romance

4  

स्वाती गुप्ता

Romance

प्रेम

प्रेम

1 min
280

मेरे लिये क्या हो तुम

इस बात को मैं बतलाती हूँ

जो ना दिखते हो एक पल भी

तो मैं विचलित हो जाती हूँ।


प्यारा सा अहसास हो तुम

मेरे दिल के पास हो तुम

कहने को तो बहुत हैं रिश्ते

पर सब रिश्तों मे खास हो तुम।


सात फेरों के सात वचनों ने

तुमको मुझसे बाँध दिया

तुमने भी तो हर पल हमदम

दिल से मेरा साथ दिया।


मेरे चेहरे की उदासी

तुमसे ना छिप पाती है

मेरी खामोशी तुमको

हर पल बड़ा सताती है।


मुझको मनाने की खातिर

तुम कुछ भी कर जाते हो

अपनी ऊटपटाँग हरकतों से

मुझको बहुत हँसाते हो।


है रसोई से प्यार तुम्हें

ना जाने क्या-क्या पकाते हो

अजीब-अजीब नाम बताकर

मुझको वो खिलाते हो।


पर जो भी हो

जैसे भी हो

मुझको बडे़ प्यारे हो तुम

अपनी माँ के तो हो ही।


मेरी आँखों के भी तारे हो तुम।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from स्वाती गुप्ता

प्रेम

प्रेम

1 min पढ़ें

Similar hindi poem from Romance