STORYMIRROR

Rashmi Prakash

Inspirational Others Children

4  

Rashmi Prakash

Inspirational Others Children

परी ( गुलाबी रंग)

परी ( गुलाबी रंग)

1 min
353

था इंतज़ार बहुत जिसका

आज वो गोद में हमारी आ गई,

देख रही टुकुर-टुकुर 

जाने कौन देश आ गई ,

गुलाबी गुलाबी गाल उसके

गुलाबी हाथ मुट्ठी भिंचे,

लगाया जब सीने से उसे

माँ की ममता छलक आई,

लग सीने से उसने 

गुलाबी होंठ अपने चिपकाएँ,

मिल रहा था अमृत उसे

सुकून चेहरे पर दिख रहा था,

जब जब देखती उसको

ममता से मैं भर जाती ,

छोटे-छोटे गुलाबी पाँव

चूम चूमकर जी बहलाती ,

लग रहा था मानो ज्यों 

नन्ही परी कोई मेरे घर आई !!



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational