STORYMIRROR

Kiran Bala

Abstract

3  

Kiran Bala

Abstract

प्रेम की धरा पर

प्रेम की धरा पर

1 min
507

रिश्ते रूपी कोमल पुष्प 

सदैव प्रेम की धरा पर 

ही अंकुरित होते हैं 


जो सहयोग की ऊष्मा से

स्वतंत्रता-सी पवन का

स्पर्श पा खिल उठते हैं 


धैर्य रूपी मुंडेर का

पा संबल सुदृढ़ता से बढ़ते हैं 

विश्ववास रूपी जल का

पा सानिध्य निखर उठते हैं


रिश्ते भावना की डोर में 

पिरोए प्रेम के मनके सम

समर्पण का प्रतीक बनते हैं 


वेदना के कोमल वेग से 

जब टूटते हैं पत्ता-पत्ता 

हो व्यथित बिखर उठते हैं।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract